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सरकारी शिक्षा मजबूत हो तभी राष्ट्र और समाज का विकास संभव : आरएस विश्वकर्माओबीसी कल्याण आयोग अध्यक्ष की बेबाक राय-योजनाओं का लाभ बढ़ाने संसाधन विस्तार जरूरी

रायगढ छत्तीसगढ़ में अन्य पिछड़ा आयोग की स्थिति,सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत और शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों को लेकर ओबीसी कल्याण आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व आईएएस अधिकारी आर एस विश्वकर्मा ने खुलकर अपनी बात रखी। अपने एक दिवसीय रायगढ़ प्रवास के दौरान रविवार को सर्किट हाउस मे मीडिया से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक सरकारी शिक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं होगी,तब तक समाज और राष्ट्र का समग्र विकास संभव नहीं है।विश्वकर्मा ने कहा कि राज्य में ओबीसी वर्ग का सबसे पिछड़ा तबका वही है,जो आज भी अपने पारंपरिक कार्यों में ही सीमित है और समय के साथ खुद को अपग्रेड नहीं कर पाया।सरकार की कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा और मुद्रा जैसी योजनाएं होने के बावजूद इनका पूरा लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंच पा रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में ओबीसी वर्ग के लिए अलग से कोई विशेष योजना नहीं है, बल्कि सामान्य योजनाएं ही लागू हैं। हालांकि आयोग द्वारा इस बात का सर्वे किया जा रहा है कि जमीनी स्तर पर योजनाओं का वास्तविक लाभ कितने लोगों तक पहुंच रहा है। प्रदेश के सुकमा और दंतेवाड़ा जैसे आदिवासी जिलों में समस्याएं अधिक होने की बात कहते हुए उन्होंने बताया कि बड़े शहरों में सबसे बड़ी चुनौती शिक्षा की गुणवत्ता है। “सरकारी स्कूलों और स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर अभी संतोषजनक नहीं है,इसे बेहतर बनाना ही होगा,उन्होंने कहा।पूर्व सरकार द्वारा शुरू की गई आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे एक सकारात्मक पहल बताया और इसे आगे बढ़ाने पर जोर दिया। उनका कहना था कि जिस दिन अभिभावक निजी स्कूलों की बजाय सरकारी स्कूलों पर भरोसा करने लगेंगे,उसी दिन वास्तविक सामाजिक बदलाव की शुरुआत होगी। आयोग की भूमिका पर आरएस विश्वकर्मा स्पष्ट किया कि यह सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित संस्था है, जो ओबीसी वर्ग की भागीदारी और स्थिति पर डेटा एकत्र कर सरकार को सिफारिशें देती है। उन्होंने यह भी कहा कि आयोग की रिपोर्ट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और सरकार को उस पर निर्णय लेना ही होगा।श्री विश्वकर्मा ने यह भी स्वीकार किया कि योजनाओं का लाभ अभी सभी तक नहीं पहुंच पा रहा है, जिसका एक बड़ा कारण सीमित संसाधन हैं।“रिसोर्स बढ़ाना जरूरी है,तभी योजनाओं का दायरा और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे,उन्होंने कहा। युवाओं के संदर्भ में उन्होंने शिक्षा सुविधाओं के विस्तार,छात्रवृत्ति, तकनीकी शिक्षा और रोजगार के नए अवसरों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई।आम लोगों को आयोग तक अपनी बात पहुंचाने के लिए उन्होंने सीधे संपर्क और ऑनलाइन माध्यम दोनों को आसान विकल्प बताया। साथ ही भरोसा दिलाया कि आयोग तक पहुंचने वाली शिकायतों का यथासंभव समाधान किया जाता है। अन्य पिछड़ा आयोग के अध्यक्ष आर एस विश्वकर्मा से हुई वार्ता का निष्कर्ष यह निकलता है कि ओबीसी वर्ग की वास्तविक प्रगति के लिए केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं, बल्कि उन्हें प्रभावी ढंग से जमीनी स्तर तक पहुंचाना जरूरी है। संसाधनों का विस्तार और शिक्षा व्यवस्था में सुधार ही वह आधार है, जिससे सामाजिक और आर्थिक बदलाव की मजबूत नींव रखी जा सकती है।

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