Homeरायगढ़ न्यूजसजा से सुधार की ओर रायगढ़ जेल,कौशल विकास से उज्जवल भविष्य गढ़...

सजा से सुधार की ओर रायगढ़ जेल,कौशल विकास से उज्जवल भविष्य गढ़ रहे कैदी,एसबीआई रेसिट के सहयोग से 35 बंदियों को मशरुम उत्पादन का प्रशिक्षण

रायगढ़ जेलों में अब कैदियों को सिर्फ सजा नहीं,बल्कि मुख्यधारा में लौटने के लिए कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण (जैसे सिलाई, कंप्यूटर,बढ़ईगिरी,जैविक खेती) दिया जा रहा है,जिससे वे रिहाई के बाद आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।यह सुधारात्मक दृष्टिकोण, जिसे अब “सुधार गृह” कहा जा रहा है,कैदियों को आत्मनिर्भर बनाकर सामाजिक मुख्यधारा में फिर से एकीकृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।इसी कड़ी में निश्चय कार्यक्रम के अंतर्गत जेल महानिदेशक के आदेश पर जिला जेल में 35 कैदियों को 10 दिवसीय मशरुम प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण एसबीआई रेसिट के सहयोग से संचालित हो रहा है। इस प्रशिक्षण के विषय में जानकारी देते हुए जिला जेल अधीक्षक जीएस शौरी ने बताया कि आमतौर पर किसी भी वजह से सजा काट रहे कैदियों के लिए रिहाई का मतलब आज़ादी नहीं होता—अक्सर इसका मतलब अलगाव होता है।परिवार तनावग्रस्त हो जाते हैं,आजीविका अनिश्चित हो जाती है,और कलंक लगातार पीछा करता रहता है।इस पहल का मुख्य उद्देश्य कैदियों को कौशल प्रदान करना है,ताकि वे रिहाई के बाद दोबारा अपराध न करें और सम्मानजनक जीवन जी सकें। कौशल विकास से जुड़कर सजायाफ्ता कैदी रिहाई के बाद सम्पत्ति बनकर लौटते हैं। गौरतलब है कि जेल में कौशल विकास कार्यक्रम चलाना आसान नहीं होता है लेकिन कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय के तहत विभिन्न संस्थाओं के माध्यम और जेल प्रशासन के सहयोग से प्रशिक्षण कार्यक्रम को आसानी से पूरा किया गया है।श्री शौरी ने कहा कि “हमारा प्रयास है कि विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से जेल कैदियों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करना” ताकि वे बेहतर आजीविका के साथ अपना जीवन स्तर सुधार सकें।कैदियों को रोजगार योग्य कौशल और नैतिक मूल्यों से लैस करके,आपराधिक न्याय प्रणाली पुनरावृत्ति को कम कर सकती है और समाज में उनके सुचारू पुनर्एकीकरण को सुगम बना सकती है।पुनर्वास कौशल प्रशिक्षण की आवश्यकता नैतिक और व्यावहारिक दोनों ही दृष्टियों से प्रबल है।उल्लेखनीय है कि जेलों को अक्सर दंड,एकांतवास और सुधार के स्थान के रूप में देखा जाता है।हालांकि,कारावास का वास्तविक उद्देश्य केवल कैद करना नहीं है,इसका लक्ष्य अपराधियों को जिम्मेदार और कानून का पालन करने वाले नागरिक बनाना भी है।आधुनिक दंडशास्त्र में,ध्यान धीरे-धीरे प्रतिशोध से पुनर्वास की ओर स्थानांतरित हो गया है,यह मानते हुए कि अपराध अक्सर सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक कमियों का परिणाम होता है। शिक्षा और कौशल विकास इस पुनर्वास प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।ये न केवल कैदियों को ज्ञान और व्यावहारिक क्षमताएं प्राप्त करने में मदद करते हैं,बल्कि उनकी गरिमा, आत्म-सम्मान और उद्देश्य की भावना को भी बहाल करते हैं।

spot_img

Must Read

spot_img