रायगढ़ जिले के नगर पंचायत घरघोड़ा में ‘सुशासन तिहार 2026’के प्रचार का एक ऐसा तरीका सामने आया है,जिसने प्रचार व्यवस्था और सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामने आई तस्वीर में घर-घर से कचरा संग्रहण के लिए उपयोग किए जाने वाले वाहन पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की तस्वीर वाला ‘सुशासन तिहार’ का होर्डिंग लगा दिखाई दे रहा है।सफाई व्यवस्था के लिए इस्तेमाल होने वाले वाहन को सरकारी योजनाओं के प्रचार का माध्यम बनाए जाने से अब यह सवाल चर्चा में है कि क्या कचरा संग्रहण वाहन पर इस तरह की प्रचार सामग्री लगाने के लिए विधिवत अनुमति ली गई थी?यदि अनुमति दी गई थी तो किस स्तर से और किस प्रावधान के तहत?सफाई का वाहन बन गया प्रचार का माध्यमनगर पंचायत के कचरा संग्रहण वाहन का मूल उद्देश्य शहर की सफाई व्यवस्था को सुचारु रखना और घर-घर से कचरा एकत्र करना है। ऐसे वाहन पर मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से संबंधित होर्डिंग नजर आने के बाद नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर चर्चा होना स्वाभाविक है।सरकारी योजनाओं और अभियानों का प्रचार प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन प्रचार के लिए सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल की प्रक्रिया क्या है, यह स्पष्ट होना जरूरी है। खासकर तब,जब प्रचार सामग्री किसी सार्वजनिक पदाधिकारी की तस्वीर के साथ लगाई गई हो।होर्डिंग किसने लगाई,अनुमति किसने दी?तस्वीर सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि कचरा संग्रहण वाहन पर होर्डिंग लगाने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया? क्या नगर पंचायत ने इसकी अनुमति दी थी? क्या संबंधित वाहन को प्रचार के लिए उपयोग करने का कोई आदेश जारी हुआ था? यदि आदेश जारी हुआ तो उसका आधार और अवधि क्या थी? और यदि इसके लिए कोई भुगतान हुआ,तो वह किस मद से किया गया?इन सवालों का जवाब नगर पंचायत प्रशासन की ओर से सामने आना अभी बाकी हैसुशासन’ के प्रचार में व्यवस्था की पारदर्शिता भी जरूरी‘सुशासन तिहार’ जैसे सरकारी अभियान का उद्देश्य शासन की योजनाओं और उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाना है। ऐसे में प्रचार माध्यम को लेकर भी पारदर्शिता महत्वपूर्ण है। यदि कचरा संग्रहण वाहन पर प्रचार सामग्री लगाने की अनुमति नियमों के तहत दी गई है तो नगर पंचायत को इसकी जानकारी स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं, यदि निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ है तो संबंधित स्तर पर जिम्मेदारी तय किए जाने की जरूरत होगी।अब जवाब तस्वीर नहीं, दस्तावेज देंगेमामला फिलहाल एक तस्वीर के जरिए सामने आया है। इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले नगर पंचायत प्रशासन का पक्ष और संबंधित अनुमति/आदेश की जानकारी सामने आना जरूरी है।अब निगाह इस बात पर है कि नगर पंचायत घरघोड़ा इस तस्वीर पर क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या प्रचार सामग्री लगाने की अनुमति से संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाते हैं।यदि प्रक्रिया में कोई अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? और होर्डिंग तैयार करने और लगाने का खर्च किस मद से किया गया?
कचरा गाड़ी पर मुख्यमंत्री का होर्डिंगघरघोड़ा में ‘सुशासन तिहार’ के प्रचार का अनोखा अंदाज,तस्वीर सामने आते ही उठे सवाल-किसकी अनुमति से लगा प्रचार?
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