रायगढ़ अंत्योदय राशन कार्डधारियों को पिछले चार-पांच महीनों से शक्कर नहीं मिलने के मामले को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी के शहर अध्यक्ष शाखा यादव ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा व्यंग्य करते हुए कहा है कि सरकार गरीबों के राशन में भी ऐसी नीति चला रही है, जिसका हिसाब शायद सरकार के पास भी नहीं है।शाखा यादव ने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में अंत्योदय कार्डधारी ऐसे परिवार हैं,जिन्हें शासन ने आर्थिक रूप से कमजोर मानते हुए इस श्रेणी में रखा है। ऐसे परिवारों के लिए राशन की एक-एक वस्तु का अपना महत्व है। पिछले चार-पांच महीनों से इन्हीं पात्र हितग्राहियों को शक्कर नहीं मिल रही है। ऊपर से देश में शक्कर के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। जिस वस्तु को बाजार से खरीदना गरीब परिवारों के लिए पहले ही मुश्किल है,वही वस्तु सरकार की राशन दुकान से भी न मिले तो अंत्योदय परिवार आखिर जाएं कहां?उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि प्रदेश की राशन व्यवस्था का भी कमाल है—जब चावल का आबंटन नहीं आता, तब कई राशन दुकान संचालकों की ओर से हितग्राहियों को चावल के बदले पैसे देने का प्रस्ताव सामने आ जाता है। अब चार-पांच महीने से शक्कर नहीं मिली है, तो सरकार और राशन दुकान संचालकों को शक्कर के बदले पैसे देने की वही दरियादिली क्यों नहीं दिखाई दे रही?शाखा यादव ने कहा कि प्रदेश में संचालित अधिकांश शासकीय राशन दुकानों के संचालकों के संबंध सत्तापक्ष से बताए जाते हैं। ऐसे में जब हितग्राहियों को चावल नहीं मिलता,तब यही संचालकों द्वारा हितग्राहियों को चावल के बदले पैसे देने की व्यवस्था का रास्ता खोज लिया जाता है। फिर शक्कर के मामले में यह व्यवस्था क्यों नहीं हो सकती? क्या गरीब की थाली में चावल का मूल्य है और शक्कर का कोई मूल्य नहीं?उन्होंने कहा कि आज बाजार में शक्कर की कीमत जिस तेजी से बढ़ी है, उसमें अंत्योदय परिवार के लिए खुले बाजार से शक्कर खरीदना आसान नहीं है। इन परिवारों को सरकार ने स्वयं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग में रखा है। इसलिए राशन व्यवस्था में मिलने वाली शक्कर उनके लिए महज एक सुविधा नहीं,घरेलू जरूरत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।शाखा यादव ने कहा कि सरकार के पास यदि शक्कर उपलब्ध नहीं है तो कम से कम उसकी कीमत के बराबर राशि हितग्राही के खाते में देने की व्यवस्था करनी चाहिए। जब सरकार राशन के माध्यम से गरीब परिवारों को राहत देने का दावा करती है, तो उस राहत को कागजों और घोषणाओं तक सीमित रखने से काम नहीं चलेगा।उन्होंने भाजपा सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि गरीब के राशन कार्ड पर अंत्योदय लिख देने से उसका पेट नहीं भरता। राशन की दुकान पर चावल-शक्कर का इंतजार करते परिवार को वास्तविक राहत चाहिए। चार-पांच महीने तक शक्कर न मिलना शासन की राशन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।शाखा यादव ने कहा कि सरकार एक ओर गरीबों के हित में बड़ी-बड़ी योजनाओं का प्रचार करती है,दूसरी ओर अंत्योदय परिवारों को मिलने वाली आवश्यक खाद्य सामग्री महीनों तक नहीं मिलती। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि शक्कर का आबंटन क्यों रुका, चार-पांच महीने की कमी कब पूरी होगी और जिन हितग्राहियों को शक्कर नहीं मिली है, उन्हें उसका लाभ कब मिलेगा?उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि अंत्योदय कार्डधारियों को लंबित चार-पांच महीने की शक्कर तत्काल उपलब्ध कराई जाए। यदि शक्कर का आबंटन उपलब्ध नहीं है और सरकार शक्कर देने में असमर्थ है, तो उसके निर्धारित मूल्य के बराबर राशि हितग्राहियों को दी जाए।शाखा यादव ने कहा कि सरकार गरीबों के राशन में भी दोहरा मापदंड अपनाना बंद करे। चावल के बदले पैसा देने का रास्ता दिखाई देता है तो शक्कर के बदले पैसा देने का रास्ता भी सरकार को दिखाई देना चाहिए। गरीब के हिस्से की शक्कर गायब हो जाए और सरकार की संवेदना भी गायब हो जाए, यह स्थिति स्वीकार नहीं की जा सकती।
चावल का आबंटन रुके तो पैसा देने की दरियादिली, शक्कर गायब हो तो मौन क्यों-शाखा यादव
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