रायगढ़ हिंदी विभाग,शासकीय महात्मा गाँधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय खरसिया के विभागाध्यक्ष डॉ. रमेश टंडन के अभिनव पहल से 27 सितम्बर 2026 को विभाग के छात्रों ने रायगढ़ निवासी एक प्रसिद्ध साहित्यकार से सौजन्य भेंट करते हुए उनके साहित्यिक अवदान को जाना.सनसार,समारम्भ,रामभजन काव्य धारा, रामभजन काव्य प्रवाह, श्री मद भागवत कथा का पद्यानुवाद, ऊँहा ले ईंहा,मानव जीवन और कर्म जैसे महत्वपूर्ण लगभग एक दर्जन मौलिक किताबों के लेखक रामभजन पटेल से उनके बड़े पुत्र के निवास स्थान चपले में भेंट करके छात्रों ने उनके जीवन से परिचय प्राप्त किया.विभिन्न विधाओं जैसे काव्य, उपन्यास,निबंध के रूप में प्रकाशित कृतियों के बारे में पटेल जी ने विस्तार से चर्चा की.उन्होंने परिचर्चा के दौरान छात्रों को बताया कि हमारे दिमाग में रोज साठ हजार विचार आते हैं.उनमें कुछ नकारात्मक विचार होते हैं तो कुछ सकारात्मक विचार होते हैं. कुछ विचारों को हम भूल भी जाते हैं. हमें चाहिए की हम कुछ सकारात्मक विचारों को लिपिबद्ध करें. साहित्यकार वही तो करता है. अपने अन्दर आने वाले भावों को कर्मणा शक्ति में परिवर्तित करके साहित्य में पिरोता है और आने वाली पीढ़ी को नयी दिशा देता है.एम ए हिंदी के छात्र रतिराम भारद्वाज,रामकुमार चौहान,नेहा सारथी,रामकुमारी पटैल,सुनिमती राठिया,रीना साहू, चन्द्रकला,उत्तम कुमार,कान्ति राठिया, ताराचंद,नीलकमल राठिया सहित अन्य हिंदी पाठक बलराम सूर्या, दुर्गेश पटैल,कोमल पटैल आदि छात्रों की साहित्यिक जिज्ञासा को साहित्यकार रामभजन पटेल ने जवाब देकर संतुष्ट भी किया और उन्हें एक लेखक का समाज व देश के प्रति उत्तरदायित्व को बताया. उन्होंने अपने जीवन की कठिनाइयों के बारे में भी भेंटकर्ता छात्रों को बताया कि कैसे वे मात्र तिहत्तर रुपए की मासिक शिक्षकीय नौकरी से जीवन की शुरुआत की और विभिन्न बाधाओं से पार करते हुए प्राचार्य के पद से सेवानिवृत्त हुए.शासकीय नवीन महाविद्यालय चपले के प्राचार्य गोविन्द राठिया और शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय काशीचुआं के व्याख्याता दीनबंधु चौहान भी इस साहित्यिक यात्रा के महत्वपूर्ण हिस्सा बनते हुए छात्रों को संबोधित किया.डॉ.रमेश टंडन ने उक्त अवसर पर छात्रों से कहा कि जब भी कोई अच्छा विचार आए, उसे तुरंत अपने मोबाइल में टाइप करके खुद को व्हाट्सप कर दें, फिर जैसे ही फुर्सत के क्षण मिले,उस विचार को कविता,कहानी या लेख के माध्यम से विस्तार करें.उसके बाद भाषा के किसी अच्छे जानकार से लेख की व्याकरण संबंधी जाँच करायें.हिंदी साहित्य के छात्रों के आगमन से पूरा माहौल साहित्यिक हो गया था.सभी छात्रों ने हिंदी पखवाडा के अंतर्गत की गयी इस शैक्षणिक यात्रा से साहित्यकार रामभजन पटेल के साहित्यिक अनुभव का लाभ उठाते हुए उनसे प्रेरणा प्राप्त की.डॉ रमेश टंडन ने तिरासी वर्षीय वरिष्ठ लेखक रामभजन पटेल को अपनी कृति छत्तीसगढ़ी उपन्यास भकली-जकली भेंट करते हुए गुलदस्ता,श्रीफल, लेखनी और अंगवस्त्र से सम्मान भी किया.अंत में उनके पुत्र शोभेन्द्र पटेल व पुत्र वधु शकुंतला पटेल ने समस्त अतिथि छात्रों के प्रति आभार व्यक्त किया
सकारात्मक चिंतन को लिपिबद्ध करें-रामभजन पटेल
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