रायगढ़। दस दिनों तक रायगढ़ की धरती पर कला, संगीत और संस्कृति का ऐसा संगम सजा कि 41वें चक्रधर समारोह का समापन भी अपने पीछे यादों की एक लंबी इबारत छोड़ गया। अंतिम शाम स्वर कोकिला कविता कृष्णमूर्ति के सुरीले गीतों ने जब वातावरण को सुरमयी किया तो पूरा समारोह मानो अपनी सफलता के चरम पर पहुंच गया। हालांकि इस भव्य आयोजन की चमक केवल मंच पर प्रस्तुति देने वाले कलाकारों तक सीमित नहीं रही। इसके पीछे आयोजन को आकार देने वाले उन चेहरों की भी उतनी ही अहम भूमिका रही, जिन्होंने दस दिनों तक इसकी हर कड़ी को मजबूती से संभाले रखा। आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के नेतृत्व में जिला प्रशासन की सुनियोजित तैयारियां,मुख्य उद्घोषक प्रो. अंबिका वर्मा की दमदार और प्रभावशाली आवाज,नगर विधायक ओपी चौधरी की दूरदर्शी पहल,राजपरिवार के सदस्य एवं राज्यसभा सांसद कुमार देवेंद्र प्रताप सिंह की सक्रिय सहभागिता और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन मे आईपीएस मयंक मिश्रा एवं टीम की मुस्तैद सुरक्षा व्यवस्था ने इस विराट आयोजन को सफलता की मुकम्मल तस्वीर दी। खास तौर पर बस्तर में नक्सल हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटे आदिवासियों को चक्रधर समारोह के प्रतिष्ठित मंच तक पहुंचाने की पहल ने समारोह को सांस्कृतिक आयोजन से आगे बढ़ाकर बदलते छत्तीसगढ़ की एक संवेदनशील तस्वीर भी बना दिया। देशभर से आए कलाकार जब रायगढ़ की मेहमाननवाजी, आयोजन की भव्यता और व्यवस्थाओं की प्रशंसा कर लौटे, तो उनकी प्रशंसा में मंच के साथ-साथ पर्दे के पीछे खड़े इन सभी ‘शिल्पकारों’ की मेहनत भी साफ दिखाई दी।
मंच पर सितारे चमके, पर्दे के पीछे भी दमके ‘चक्रधर’ के शिल्पकार,कविता कृष्णमूर्ति के सुरों से हुआ दस दिवसीय महोत्सव का भव्य समापन,प्रशासन की कुशलता, जनप्रतिनिधियों की दूरदर्शिता और पुलिस की मुस्तैदी ने रचा सफलता का नया अध्याय
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