रायगढ़ चिकित्सा पेशा केवल बीमारी का इलाज करना नहीं,बल्कि पीड़ित इंसान के दर्द को समझना और कठिन परिस्थितियों में भी उसके साथ खड़े रहना है। रायगढ़ के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ.आरएल अग्रवाल ( एमबीबीएस,एमडी) ने अपने जीवन और दीर्घ चिकित्सकीय सफर से इस भावना को चरितार्थ किया है।शारीरिक चुनौतियों ने भले ही उनके कदमों को रोक दिया,लेकिन मरीजों की सेवा का उनका संकल्प कभी नहीं डगमगाया।लगभग चार दशकों से व्हीलचेयर का सहारा लेकर भी वे निरंतर मरीजों की जांच करते रहे हैं और चिकित्सा सेवा को अपना कर्म एवं कर्तव्य मानकर निभाते आ रहे हैं।छत्तीसगढ़ के सरायपाली क्षेत्र के एक साधारण मारवाड़ी परिवार में जन्मे डॉ.अग्रवाल ने चिकित्सा शिक्षा हासिल कर रायगढ़ को अपनी कर्मभूमि बनाया। जनरल मेडिसिन में विशेषज्ञता प्राप्त करने के बाद उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा मरीजों की सेवा में समर्पित कर दिया। उनके लिए चिकित्सक होना केवल एक पेशा नहीं रहा,बल्कि यह मानवीय सेवा का माध्यम बन गया।शरीर ने साथ छोड़ा,हौसले ने नहींजीवन में आई गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों के बाद उन्हें लंबे समय से व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ रहा है। सामान्य परिस्थितियों में जहां ऐसी स्थिति किसी व्यक्ति की सक्रियता को सीमित कर सकती है,वहीं डॉ.अग्रवाल ने इसे अपने कर्तव्य के आड़े नहीं आने दिया। व्हीलचेयर पर बैठकर ही वे मरीजों से मिलते हैं,उनकी समस्याएं सुनते हैं,चिकित्सकीय परीक्षण करते हैं और उपचार की दिशा तय करते हैंउनका यह संघर्ष केवल व्यक्तिगत जिजीविषा की कहानी नहीं है, बल्कि समाज के लिए यह संदेश भी है कि परिस्थितियां चाहे कितनी कठिन क्यों न हों,यदि संकल्प मजबूत हो तो सेवा का रास्ता बंद नहीं होता।पांच दशक का भरोसाडॉ.अग्रवाल की चिकित्सा सेवा से जुड़े मरीजों की लंबी श्रृंखला आज भी उनके प्रति विश्वास की कहानी कहती है।उनके उपचार का लाभ लेने वाले अनेक परिवारों की कई पीढ़ियां उनके चिकित्सकीय मार्गदर्शन से जुड़ी रही हैं।लेखक स्वयं भी लगभग चार दशकों से डॉ.अग्रवाल की चिकित्सा सेवा का लाभ लेते रहे हैं।यह व्यक्तिगत अनुभव बताता है कि चिकित्सक और मरीज के बीच का रिश्ता केवल बीमारी और दवा तक सीमित नहीं होता। वर्षों के विश्वास,आत्मीयता और सेवा से यह रिश्ता परिवार जैसा बन जाता है।सेवा की परंपरा को आगे बढ़ा रहे डॉ.प्रशांतडॉ.आरएल अग्रवाल की सेवा-परंपरा को उनके पुत्र डॉ.प्रशांत अग्रवाल भी आगे बढ़ा रहे हैं। पिता के पदचिह्नों पर चलते हुए चिकित्सा क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे डॉ.प्रशांत नई पीढ़ी के लिए इस बात का उदाहरण हैं कि चिकित्सा ज्ञान के साथ संवेदना और सेवा भाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है।शहर के गौशाला चौक स्थित स्थित डॉ.आर.एल.हॉस्पिटल एंड आईवीएफ सेंटर के माध्यम से भी चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार हुआ है।संस्थान में आधुनिकउपचार,आपातकालीन सेवाओं और विभिन्न चिकित्सा सुविधाओं के जरिए मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।डॉक्टर से बढ़कर भरोसे कानामडॉ.आर.एल.अग्रवाल की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो जीवन की कठिन परिस्थितियों के सामने हार मानने लगते हैं।उनका जीवन यह सिखाता है कि सेवा के लिए केवल स्वस्थ शरीर ही नहीं, बल्कि मजबूत इच्छाशक्ति और संवेदनशील हृदय की भी आवश्यकता होती है।पांच दशकों से चिकित्सा सेवा में विश्वास का यह रिश्ता आज भी कायम है और आगे भी जारी रहेगा।*डॉ.आर.एल. अग्रवाल के दीर्घ,स्वस्थ और सक्रिय जीवन के लिए हार्दिक शुभकामनाएं तथा डॉ. प्रशांत अग्रवाल को पिता की सेवा-परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए शुभकामनाएं।
व्हीलचेयर पर बैठकर भी दशकों से बांट रहे जिंदगी की उम्मीदसेवा,समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की जीवंत मिसाल हैं डॉ. आर.एल.अग्रवालपांच दशक से मरीजों के भरोसे का नाम
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