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​छत्तीसगढ़ी संगीत साम्राज्य के ‘वन मैन आर्मी’ बने नितिन दुबे:गायकी से लेकर निर्माण तक,अकेले रच रहे हैं सफलता का इतिहास

​रायगढ़ छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री और संगीत जगत में जब भी किसी सुपरहिट गीत की बात होती है, तो अक्सर सारा श्रेय गायक की झोली में डाल दिया जाता है। लेकिन इस संगीत जगत में एक ऐसा नाम भी है, जिसे केवल ‘गायक’ कहना उनकी व्यापक प्रतिभा के साथ अन्याय होगा। छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध कलाकार नितिन दुबे आज एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक संस्था और ‘वन मैन आर्मी’ बनकर उभरे हैं,जिन्होंने पिछले 25 वर्षों से संगीत की परिभाषा को अपनी मेहनत से बदल दिया है।​बहुमुखी प्रतिभा के धनी:एक ही छत के नीचे पूरी ‘फौज’​आमतौर पर एक ब्लॉकबस्टर गीत के पीछे संगीतकार, निर्माता,अभिनेता और गायक की एक पूरी टीम काम करती है। लेकिन नितिन दुबे के मामले में यह समीकरण पूरी तरह भिन्न है। वे अपने गीतों के न केवल गायक होते हैं, बल्कि उनके अधिकांश कालजयी गीतों के पीछे की धुन (Composition), संगीत संयोजन (Music Arrangement), अभिनय और निर्माण (Production) की जिम्मेदारी भी वे खुद ही संभालते हैं।​मील के पत्थर बने सुपरहिट गीत​नितिन दुबे ने छत्तीसगढ़ी संगीत को एक के बाद एक कई ऐतिहासिक सौगातें दी हैं। उनके कुछ प्रमुख गीतों की सूची इस प्रकार है:​गोंदा तोला रे ,​नीलपरी,​ तोर बारात,​मुनगाकाड़ी,​रायगढ़ वाला राजा,​कोचईपान,​चाँदनी,मंदाकिनी,​दिल के धड़कन,​धड़कन के साज़ ​ये गीत केवल मनोरंजन के साधन नहीं,बल्कि छत्तीसगढ़ी कला जगत के ‘माइलस्टोन्स’ बन चुके हैं।​संघर्ष और साधना का संगम​अपनी सफलता पर विनम्रता से बात करते हुए नितिन दुबे कहते हैं,​”इतनी विधाओं में एक साथ काम करके किस्मत से एक या दो गीत हिट हो सकते हैं, लेकिन 25 वर्षों तक लगातार दर्शकों का प्यार और सुपरहिट देना केवल ईश्वरीय कृपा और बड़ों का आशीर्वाद है।”
​उनका मानना है कि ‘रायगढ़ वाला राजा’ जैसे गीतों को कोई भी अच्छा गायक गा सकता है,लेकिन उस मौलिक धुन को जन्म देना,संगीत का ताना-बाना बुनना और फिर पर्दे पर उसे अभिनय के जरिए जीवंत करना एक कठिन कला साधना है। यही वह मेहनत है जो उन्हें गायकों की भीड़ से अलग एक ‘कंप्लीट आर्टिस्ट’ के रूप में स्थापित करती है।​संस्कृति के संवाहक​पिछले ढाई दशकों से छत्तीसगढ़ी संस्कृति को अपने सुरों और कला से सींचने वाले नितिन दुबे आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उनकी यात्रा इस बात का प्रमाण है कि यदि प्रतिभा के साथ समर्पण और माता-पिता का आशीर्वाद जुड़ जाए, तो इतिहास रचा जा सकता है।​छत्तीसगढ़ के इस ‘रायगढ़ वाले राजा’ का सफर न केवल नए कलाकारों के लिए प्रेरणा है,बल्कि यह इस बात पर मुहर लगाता है कि वे संगीत को केवल गाते नहीं, बल्कि उसे जीते हैं।

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