रायगढ़ प्रदान संस्था द्वारा एचडीएफसी बैंक परिवर्तन सीएसआर परियोजना के सहयोग से रायगढ़ जिले के रायगढ़, पुसौर और लैलूंगा जनपद के 11 गांवों में “नवा तरिया, कमई अउ पर्यावरण बचाय के जरिया” थीम पर आजीविका तालाब मॉडल का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। यह पहल जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा तथा ग्रामीण महिलाओं और सीमांत किसान परिवारों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में सामने आई है।प्रदान संस्था ने महिला स्व-सहायता समूहों,ग्राम संगठनों तथा क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) के साथ मिलकर इन मॉडल तालाबों को विकसित किया है। इन तालाबों का उद्देश्य केवल वर्षा जल का संरक्षण करना नहीं, बल्कि इन्हें ग्रामीण परिवारों के लिए स्थायी आजीविका का आधार बनाना है। इस पहल से महिलाओं और सीमांत किसान परिवारों को गांव में ही रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर प्राप्त होंगे।इन मॉडल तालाबों के माध्यम से मछली पालन, बतख पालन,सब्जी उत्पादन,केला खेती, सिंघाड़ा उत्पादन तथा अन्य जल आधारित आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे एक ओर जहां ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि होगी, वहीं दूसरी ओर गांवों में पोषण, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। तालाबों के किनारों पर वृक्षारोपण और हरित क्षेत्र विकसित करने की योजना भी बनाई गई है, जिससे स्थानीय जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।तालाबों का चयन और निर्माण “रिज टू वैली”अवधारणा के आधार पर किया गया है। इसके लिए Clart ऐप और GIS आधारित तकनीक का उपयोग करते हुए वैज्ञानिक तरीके से स्थल चयन किया गया। इस प्रक्रिया के तहत ऐसे स्थानों को प्राथमिकता दी गई, जहां वर्षा जल का अधिकतम संचयन हो सके तथा सतही जल संरक्षण के साथ भू-जल स्तर में भी सुधार आए। वैज्ञानिक तरीके से तैयार किए गए ये तालाब भविष्य में अधिक उपयोगी,टिकाऊ और प्रभावी सिद्ध होंगे।प्रदान संस्था द्वारा ग्राम पंचायतों,महिला समूहों, ग्राम संगठनों और CLF की महिलाओं के साथ लगातार बैठकें और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन बैठकों में महिलाओं को तालाब प्रबंधन,जल आधारित आजीविका, सामुदायिक नेतृत्व तथा तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी जा रही है। संस्था का मानना है कि महिलाओं और पंचायतों की सक्रिय भागीदारी से यह पहल आने वाले समय में जल संरक्षण और ग्रामीण विकास का एक सफल मॉडल बनेगी।प्रदान संस्था के अनुसार “नवा तरिया,कमई अउ पर्यावरण बचाय के जरिया” केवल तालाब निर्माण का अभियान नहीं है,बल्कि यह गांवों में जल, जमीन,जीविका और महिला सशक्तिकरण को जोड़ने वाला एक समग्र प्रयास है। यह पहल आने वाले समय में रायगढ़ जिले के अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणा बनेगी तथा राज्य शासन के “मोर गांव,मोर पानी”और “आजीविका खेत डबरी”अभियान को धरातल पर प्रभावी रूप से लागू करने में विशेष सहायक सिद्ध होगी।



