
रायगढ़ केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जिस बजट को सुगम एक्सप्रेस बताकर लोकसभा में दौड़ाया है उसमे छत्तीसगढ़ जैसा उभरता और बड़ा राजस्व आय वाले प्रदेश को कोई बड़ी राहत देने के बजाय माइनिंग कारिडोर बनाने का प्रस्ताव शामिल किया गया है।इतना दरकिनार हुआ है कि पूरे बजट भाषण में एक बार भी कृषि और उद्योग आधारित छत्तीसगढ़ को कुछ भी नहीं मिला।केन्द्र सरकार द्वारा बजट में छत्तीसगढ़ की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता हरेराम तिवारी ने वर्ष 2026-27 के बजट को निराशाजनक बताया है। साथ ही केन्द्रीय बजट के ठीक पहले प्रदेश में भाजपा नेताओं के नेतृत्व में गठित कमेटी की उपयोगिता पर भी सवाल उठाते हुए इसके गठन का प्रयोजन जाहिर करने की बात कही है।पीसीसी प्रवक्ता हरेराम तिवारी ने कहा कि बजट में ना तो कृषि को मजबूत करने की किसी योजना का जिक्र है और ना ही युवाओं के रोजगार को लेकर कोई स्पष्ट संकेत है।कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि बजट में माइनिंग और मिनरल को मंहगा कर दिया गया है।इसका असर छत्तीसगढ़ के खनिज आधारित उद्योगों और इससे जुड़े रोजगार पर पड़ेगा। किसानों को खेती और सिंंचाई के लिए जरुरी संसाधनों की कीमतों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। वहीं बजट में क्षेत्रीय असमानता साफ दिखाई दे रही है,और जिन राज्यों में आने वाले समय में चुनाव हैं,वहां राजनीतिक लाभ लेने के लिए विशेष रियायतें दी गई हैं।कुछ गंभीर बीमारियों के इलाज की विदेशी दवाएं सस्ती करने का एलान हुआ है लेकिन एक बड़ा सवाल यह भी है कि देश भर में परचून की दुकान जैसे मेडिकल कालेज और रिसर्च सेंटर खोलने के बावजूद स्थानीय स्तर पर गंभीर इलाज की दवायें बनने की कोशिश क्यों नहीं हो रही? हरेराम तिवारी ने कहा कि “भले ही जीडीपी में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों का योगदान बढ़कर 16 प्रतिशत हो गया है, लेकिन कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए बजट आवंटन 2024-25 के संशोधित अनुमानों से कम है।” बयान में आगे कहा गया है, “ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन पर कोई जोर नहीं है। सरकार नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रूरल डेवलपमेंट के लिए सभी फंड रोक रही है और इसके लिए बजट में शून्य आवंटन है।” वरिष्ठ पीसीसी प्रवक्ता हरेराम तिवारी ने बजट भाषण को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण को शब्दों की बाजीगरी बताया जो 2047 को ध्यान मे रखकर गढ़ा और पढ़ा गया है।




