*निराश हो चुके परिजन गंभीर मरीज को लाए मेडिकल कॉलेज, चिकित्सकों ने दी नई जिंदगी**रायपुर के निजी अस्पताल में वेंटिलेटर पर भी नहीं हुआ सुधार,रायगढ़ मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन एवं सर्जरी विभाग के संयुक्त प्रयास से नेक्रोटाइजिंग पैंक्रियाटाइटिस,लिवर एब्सेस एवं सेप्टिसीमिया के मरीज का सफल उपचार

  रायगढ़ स्व.श्री लखीराम अग्रवाल स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध संत बाबा गुरु घासीदास जी स्मृति शासकीय चिकित्सालय, रायगढ़ ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि गंभीर से गंभीर मरीज का इलाज अब रायगढ़ में ही संभव है। मेडिसिन एवं सामान्य शल्य चिकित्सा विभाग के संयुक्त प्रयास से रायगढ़ निवासी 30 वर्षीय गंभीर रूप से बीमार युवक का सफल उपचार किया गया। मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ है और उसे छुट्टी देने की तैयारी है।रायपुर में हार मान चुके थे, रायगढ़ में मिली उम्मीद*मरीज को पहले रायपुर के एक निजी अस्पताल में नेक्रोटाइजिंग पैंक्रियाटाइटिस, लिवर एब्सेस,एआरडीएस (ARDS),सेप्टिसीमिया तथा जलोदर (एसाइटिस) के उपचार के लिए भर्ती किया गया था। वहाँ उसे इंटुबेट कर वेंटिलेटर पर रखा गया, परंतु स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। उसके कई प्रकार के प्रोसीजर एवं इंटरवेंशन किए गए, जिसके फलस्वरूप उसके शरीर में कई ड्रेन लगे थे। इनमें दो पिगटेल कैथेटर शामिल थे, एक लिवर एब्सेस की निकासी के लिए तथा दूसरा नेक्रोटाइजिंग पैंक्रियाटाइटिस के लिए नेक्रोस्टॉमी के रूप में।स्थिति में सुधार न होने पर परिजन पूरी तरह निराश हो चुके थे। ऐसी अवस्था में मरीज को 22 अक्टूबर 2026 को मेडिकल कॉलेज रायगढ़ के कैजुअल्टी में अर्धचेतन अवस्था, खराब वाइटल्स तथा निम्न रक्तचाप (हाइपोटेंशन) की गंभीर स्थिति में लाया गया, जब उसे रक्तचाप बनाए रखने की दवाइयाँ चल रही थीं। जलोदर के कारण उसका पेट अत्यधिक फूला हुआ था।दो विभागों की टीम ने मिलकर संभाला मोर्चा भर्ती के बाद मरीज का सर्जरी एवं मेडिसिन विभाग के संयुक्त मार्गदर्शन में उपचार शुरू किया गया। दोनों ड्रेन की निकासी की लगातार निगरानी की गई और सात दिनों के भीतर दोनों ड्रेन निकाल दिए गए।इस दौरान मरीज को दो-तीन बार साँस लेने में तकलीफ हुई। जाँच में दाहिनी ओर गंभीर प्लूरल इफ्यूजन पाया गया,जिसके लिए इंटरकोस्टल ड्रेनेज (आईसीडी) डालकर पानी निकाला गया।इसके बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ। उसे वेंटिलेटर से हटाकर एक्सट्यूबेट किया गया तथा सभी जाँचें सामान्य सीमा में आ गईं। 10 दिनों बाद उसे आईसीयू से बाहर शिफ्ट किया गया और अब उसे अस्पताल से छुट्टी देने की तैयारी है।*सफलता के पीछे टीमवर्क*यह सफलता विभागों के आपसी समन्वय का परिणाम है। इसे मेडिसिन विभाग के डॉ.जे.के.नायक एवं सर्जरी विभाग से डॉ. एल.तिर्की तथा उनकी टीम ने संभव बनाया। सामान्य शल्य चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. ए.के. हरिप्रिया के मार्गदर्शन के बिना यह संभव नहीं था।

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