अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन -2026 नई दिल्ली में रायगढ़ जिले की गौरव डॉ.माधुरी त्रिपाठी, महासचिव -सांस्कृतिक प्रकोष्ठ विश्व हिन्दी परिषद् एवं डॉ.मनीषा त्रिपाठी संयोजक -विश्व हिन्दी परिषद् जिला-रायगढ हुई सम्मानित 

  रायगढ़ प्रतिभा किसी परिचय की मोहताज नहीं होती,जब हौसला हो बुलंद, कामयाबी कदम चूमती है।यह वाक्यांश चरितार्थ होती है दोनों विदुषी बहनें डॉ.माधुरी त्रिपाठी राष्ट्रपति पुरस्कार मारीशस गणराज्य, राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित,डॉ.मनीषा त्रिपाठी राज्यपाल पुरस्कार एवं शिक्षा दूत अलंकरण से सम्मानित। दोनों बहनें डॉ.संगीता सिंह बनाफर अध्यक्ष छत्तीसगढ़ विश्व हिन्दी परिषद् के नेतृत्व में अपनी बहुमुखी प्रतिभा से अमिट छाप छोड़ी। विश्व हिन्दी परिषद् के तत्वावधान में 30-31अक्टूबर 2026को विज्ञान भवन नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन भारत रत्न अटल हिन्दी राष्ट्रवाद और सुशासन विषय पर केंद्रित था। सम्मेलन की अध्यक्षता पद्मभूषण आचार्य यार्लगड्डा,लक्ष्मी प्रसाद अध्यक्ष विश्व हिन्दी परिषद् ने की। सम्मेलन का आयोजन एवं नेतृत्व डॉ.विपिन कुमार राष्ट्रीय महासचिव विश्व हिन्दी परिषद् की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति श्री एम.वेकैया नायडू,श्री पवित्रा मार्गेरिटा विदेश एवं वस्त्र मंत्रालय केन्द्रीय मंत्री,भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद के सदस्य,सचिव प्रोफेसर सच्चिदानंद मिश्रा,संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री अनिल ठाकुर,संस्कृति मंत्रालय से जुड़े श्री दीपक ठाकुर सहित गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। सम्मेलन में हिन्दी की वर्तमान स्थिति, वैश्विक स्तर पर उसकी स्वीकार्यता, भारतीय भाषाओं के बीच समन्वय तकनीकी नवाचार आदि विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।इस अवसर पर फिजी के राजदूत जगन्नाथ सिमी जी, इंडोनेशिया से इंदु नांदल, जम्मू-कश्मीर के चुनाव आयुक्त श्री शांतमनु ,श्री रामधारी सिंह दिनकर के पौत्र श्री अरविन्द कुमार सिंह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री रवि अय्यर उपस्थित रहे।प्रथम दिवस में आलेख वाचन एवं कविता पाठ रखा गया। जिसमें डॉ.माधुरी त्रिपाठी एवं डॉ.मनीषा त्रिपाठी की सहभागिता रही। डॉ.मनीषा त्रिपाठी रायगढ़ (छत्तीसगढ़)का आलेख चयनित 21आलेखों में से सर्वश्रेष्ठ आलेख चयनित किया गया।जिसकी सभी अतिथियों ने मुक्त कंठों से सराहना की। डॉ.माधुरी त्रिपाठी ने अपना आलेख शीर्षक -वैश्वीकरण के दौर में अटल का राष्ट्रवाद -एक विश्लेषण था।जिसे डॉ.माधुरी त्रिपाठी ने अपने ओजस्वी कविता के माध्यम से भारतरत्न अटल जी को भावांजलि देकर आलेख का वाचन की। बहुत ही सारगर्भित एवं विशिष्ट भाषा शैली का प्रयोग करते हुए सबका ध्यान आकृष्ट की। उपस्थित गणमान्य अतिथियों ने सराहना की।द्वितीय दिवस के समापन सत्र की अध्यक्षता स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री रवि अय्यर जी ने की, वरिष्ठ राजनेता एवं पूर्व सांसद श्री के.सी.त्यागी,श्री अनिल ठाकुर,डॉ.रश्मि सलूजा, डॉ.संजय पासवान, अमेरिका के संयोजक, डॉ.मृदुल कीर्ति,डॉ.दुर्गा सिन्हा जापान अध्यक्ष विश्व हिन्दी परिषद्, डॉ.रमा पूर्णिमा शर्मा आस्ट्रेलिया, श्रीमती सुनीता शर्मा कतर, श्रीमती वंदना खुराना लंदन यूके अध्यक्ष,मारीशस से श्रीमती कल्पना लाल,बहरीन से श्रीमती ममता तिवारी, थाईलैंड से सुनील सेतपौड़, नीदरलैंड से रामा तक्षक, श्रीलंका कोलंबो से अतिला कोतलावत, आस्ट्रेलिया से रामा भारद्वाज जी उपस्थित रहीं।सम्मान सत्र में मंचासीन रहे डॉ.विपिन कुमार राष्ट्रीय महासचिव विश्व हिन्दी परिषद् विदेश एवं वित्त मंत्रालय,श्री संजय पासवान, बिहार विधान परिषद पूर्व मंत्री भारत सरकार,श्री अशोक कुमार भार्गव आईएएस,डॉ.अर्जुन चव्हाण प्राध्यापक महाराष्ट्र हिन्दी परिषद,सुश्री अतिला केतलावल भारतीय दूतावास कोलंबो की गरिमामय उपस्थिति में डॉ.माधुरी त्रिपाठी त्रिपाठी एवं डॉ.मनीषा त्रिपाठी को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया।सभी ने उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी। पुनः मंच पर डॉ.मनीषा त्रिपाठी के आलेख की भूरी-भूरी प्रशंसा गणमान्य मंचासीन अतिथियों ने की। सभागार करतल ध्वनियों से गूंजायमान हुआ। इस सफलता के लिए डॉ.संगीता बनाफर मेडम जी को भी धन्यवाद् दिया गया।चूंकि छत्तीसगढ़ का यह प्रतिनिधित्व उन्हीं के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। वर्तमान में डॉ.मनीषा त्रिपाठी प्रधान पाठक शासकीय रविशंकर प्राथमिक शाला चांदमारी रायगढ़ में पदस्थ हैं।इस गर्वीली सफलता पर जिला प्रशासन,पुलिस प्रशासन,स्नेहीजनों,मित्र बंधुओं,सहकर्मी सभी ने शुभकामनाएं दी हैं। दोनों बहनों ने मीडिया के सभी साथियों,के प्रति अपनी कृतज्ञता ज्ञापित की हैं। जिनका सतत् मार्गदर्शन एवं सहयोग मिलता रहा है, भविष्य में भी मिलता रहेगा।

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