रायगढ़। राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को लेकर इन दिनों भाजपा और कांग्रेस के बीच छिड़ी सियासी जंग ने देशभक्ति को भी राजनीतिक बयानबाजी के मंच पर ला खड़ा किया है। भाजपा कांग्रेस को राष्ट्रगीत के मुद्दे पर घेर रही है तो कांग्रेस ने पलटवार करते हुए सवाल खड़ा कर दिया है कि जिस राष्ट्रगीत को आज भाजपा अपनी राजनीतिक ढाल और विपक्ष पर हमला करने का हथियार बना रही है, क्या संघ और भाजपा के लोग हर दौर में इसे उसी शिद्दत से गाते रहे हैं?
वरिष्ठ कांग्रेस प्रवक्ता हरेराम तिवारी ने भाजपा के मौजूदा अभियान को सीधे तौर पर ‘प्रोपेगैंडा’ करार देते हुए कहा कि वंदे मातरम् देश की आजादी की लड़ाई की विरासत है, किसी एक राजनीतिक दल की जागीर नहीं। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि जब जनता के सामने बेरोजगारी, महंगाई, किसानों, उद्योग और रोजमर्रा के सवाल खड़े हों, तब राष्ट्रगीत को राजनीतिक मुद्दा बनाकर भावनाओं की दुकान सजाना आसान रास्ता है।तिवारी का व्यंग्यात्मक सवाल है—“वंदे मातरम् पर भाजपा इतनी गंभीर है तो पहले यह भी बता दे कि संघ की शाखाओं में कब से नियमित रूप से इसका गायन राष्ट्रीय चरित्र प्रमाणपत्र की तरह होने लगा? क्या देशभक्ति का ठेका अब भाजपा ने ले लिया है?”उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् किसी पार्टी के जन्म के बाद पैदा नहीं हुआ। इसका इतिहास स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा है। संसद में हुई ऐतिहासिक चर्चा में भी यह तथ्य सामने आया कि गीत की रचना और उसके राष्ट्रीय आंदोलन में प्रसार का दौर आरएसएस के गठन से कई दशक पहले का है।वरिष्ठ प्रवक्ता हरेराम तिवारी ने भाजपा की राजनीति पर तंज कसते हुए कहा—कल तक राष्ट्रगीत देश की आत्मा था, आज उसे भाजपा ने चुनावी माइक्रोफोन बना दिया है। जिसे गाओ तो देशभक्त, सवाल पूछो तो राष्ट्रविरोधी—यह कैसी नई देशभक्ति की परिभाषा है? उनका कहना है कि कांग्रेस ने वंदे मातरम् का कभी अपमान नहीं किया। बल्कि कांग्रेस का वर्तमान रुख 1937 के उस ऐतिहासिक निर्णय से जुड़ा है, जिसमें गीत के शुरुआती दो पदों को राष्ट्रीय उपयोग के लिए स्वीकार किया गया था। 2026 में कांग्रेस कार्यसमिति ने भी इसी ऐतिहासिक स्थिति को आधार बनाकर पहले दो पद गाने की बात दोहराई है।हरेराम तिवारी ने कहा कि भाजपा को इतिहास पढ़ने की जरूरत है, इतिहास का राजनीतिक संपादन करने की नहीं। उनके मुताबिक वंदे मातरम् स्वतंत्रता सेनानियों की आवाज थी, किसी पार्टी के आईटी सेल की सामग्री नहीं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा—“आज भाजपा पूछ रही है कि कौन वंदे मातरम् गाता है और कौन नहीं। कल शायद यह भी तय कर देगी कि कौन कितनी बार गाएगा, किस सुर में गाएगा और किसे देशभक्ति का प्रमाणपत्र मिलेगा। सवाल सिर्फ इतना है कि देशभक्ति गीत से साबित होगी या देश के लिए किए गए काम से?”पीसीसी प्रवक्ता हरेराम तिवारी ने कहा कि राष्ट्रगीत का सम्मान होना चाहिए, लेकिन राष्ट्रगीत के नाम पर राजनीतिक ध्रुवीकरण का विरोध भी होना चाहिए। देशभक्ति दिल में हो तो उसे हर चुनाव में पोस्टर, नारा और प्रेस कांफ्रेंस बनाने की जरूरत नहीं पड़ती।
वंदे मातरम् पर भाजपा का ‘राष्ट्रवाद’कठघरे में,कांग्रेस प्रवक्ता ने पूछा-संघ की शाखाओं में कब गूंजा राष्ट्रगीत?’तिवारी बोले -इतिहास का राजनीतिक संपादन बंद करें
RELATED ARTICLES


Users Today : 21
Total Users : 5085
Views Today : 28
Views Yesterday : 58
Views Last 7 days : 602
Views Last 30 days : 1795
Views This Month : 602
Views This Year : 6674
Total views : 6675