रायगढ़ जिले में शिक्षा व्यवस्था को अधिक गुणवत्तापूर्ण,जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनाने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। इसी उद्देश्य से कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के निर्देशन में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिजीत बबन पठारे ने जिला स्तरीय प्राचार्यों की समीक्षा बैठक ली। दो पालियों में आयोजित बैठक में जिले के सभी शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों के प्राचार्य,विकासखंड शिक्षा अधिकारी,विकासखंड स्रोत समन्वयक तथा शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में नामांकन, शैक्षणिक गुणवत्ता,शिक्षा का अधिकार (आरटीई),छात्रवृत्ति, पीएम श्री योजना, यू-डाइस, बोर्ड परीक्षा परिणाम, मध्यान्ह भोजन, विद्यार्थियों की सुरक्षा तथा शासन की विभिन्न योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।बैठक को संबोधित करते हुए सीईओ श्री पठारे ने कहा कि शिक्षा शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। लक्ष्य केवल शत-प्रतिशत नामांकन तक सीमित नहीं, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित एवं प्रेरणादायी शैक्षणिक वातावरण तथा सीखने के समान अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि जिले का कोई भी बच्चा शिक्षा, छात्रवृत्ति,आरटीई अथवा शासन की किसी भी जनकल्याणकारी योजना के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए। प्रत्येक प्राचार्य अपने विद्यालय को उत्कृष्टता का केंद्र बनाने के लिए नेतृत्वकारी भूमिका निभाए। उत्कृष्ट कार्य करने वाले विद्यालयों एवं शिक्षकों को प्रोत्साहित किया जाएगा, वहीं लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।बैठक में जिले के सेवानिवृत्त शिक्षकों से समाजहित में स्वेच्छा से विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षण देने का आह्वान किया गया। जिला प्रशासन ऐसे शिक्षकों के अनुभव का स्वागत करेगा तथा शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित भी किया जाएगा। बैठक में यू-डाइस डाटा की शत-प्रतिशत एवं गुणवत्तापूर्ण प्रविष्टि, आरटीई के अंतर्गत प्रवेश, रिक्त सीटों, विद्यार्थियों की उपस्थिति तथा कक्षा पहली से 12वीं तक के परीक्षा परिणामों की समीक्षा की गई। निर्देश दिए गए कि कोई भी पात्र विद्यार्थी आरटीई, छात्रवृत्ति अथवा अन्य शासकीय योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। बैठक में निजी विद्यालयों के संचालन संबंधी प्रावधानों की समीक्षा करते हुए शिक्षकों का वेतन नियमित रूप से बैंक खाते के माध्यम से देने तथा विद्यार्थियों को किसी विशेष दुकान से यूनिफॉर्म, पुस्तक अथवा स्टेशनरी खरीदने के लिए बाध्य नहीं करने के निर्देश दिए गए। बैठक में सभी विद्यालयों में शी-बॉक्स, पॉक्सो शिकायत बॉक्स एवं सेनेटरी वेंडिंग मशीन की उपलब्धता और नियमित संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। विद्यालय परिसरों में पोषण वाटिका विकसित कर विद्यार्थियों में पोषण एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी बल दिया गया। मध्यान्ह भोजन व्यवस्था की समीक्षा के दौरान भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता एवं नियमितता पर विशेष जोर दिया गया। विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को सप्ताह में कम से कम दो दिन निरीक्षण कर स्वयं भोजन की गुणवत्ता जांचने तथा सभी प्राचार्यों को प्रतिदिन मध्यान्ह भोजन व्यवस्था की समीक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।जिला नोडल अधिकारी (छात्रवृत्ति) श्री एस.के. कर्ण ने सभी पात्र विद्यार्थियों को समय-सीमा में छात्रवृत्ति का लाभ दिलाने के निर्देश दिए। पीएम श्री प्रभारी एवं एपीसी श्री अभय पांडे ने कहा कि जिले के सभी पीएम श्री विद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, नवाचार और विद्यार्थी-केंद्रित गतिविधियों के माध्यम से रोल मॉडल विद्यालय के रूप में विकसित किए जाएं। एपीसी श्रीमती पूनम सिंह ने एमबीयू कार्यों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि निर्धारित शिविर के दिन सभी लंबित कार्य पूरे किए जाएं तथा आवश्यकता पड़ने पर पुनः शिविर आयोजित कर कार्यों का शीघ्र निराकरण किया जाए। बैठक में जिले के सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारी, विकासखंड स्रोत समन्वयक, शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों के प्राचार्य तथा जिला शिक्षा कार्यालय एवं समग्र शिक्षा के संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
विद्यालय को उत्कृष्टता का केंद्र बनाने के लिए नेतृत्वकारी भूमिका निभाएं प्राचार्य-जिप सीईओसेवानिवृत्त शिक्षकों से शिक्षा दान का आह्वान,गुणवत्तापूर्ण शिक्षा,अनुशासन और जवाबदेही पर प्रशासन का विशेष फोकसशिक्षा व्यवस्था को अधिक गुणवत्तापूर्ण,जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनाने प्राचार्यों की बैठक आयोजित
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