रायगढ़ छत्तीसगढ़ की सत्ता में भाजपा की वापसी और रायगढ़ विधानसभा में ओपी चौधरी की बड़ी जीत को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाना पटोले ने सोमवार को रायगढ़ में ऐसा राजनीतिक हमला बोला है,जिसने चुनावी जनादेश की विश्वसनीयता को फिर बहस के केंद्र में ला दिया है।महाराष्ट्र से छत्तीसगढ़ तक भाजपा की चुनावी जीत पर सवाल उठाते हुए पटोले ने आरोप लगाया कि भाजपा ने वोट चोरी के सहारे सरकारें बनाई हैं। रायगढ़ में प्रकाश नायक को पिछले चुनाव की तुलना में अधिक वोट मिलने के बावजूद करीब 65 हजार मतों के अंतर से मिली हार का जिक्र करते हुए उन्होंने इस नतीजे को भी कथित वोट चोरी के षड्यंत्र से जोड़कर सवाल खड़े किए।पटोले के इस बयान का राजनीतिक संदेश साफ है—कांग्रेस अब अपनी चुनावी पराजयों को केवल राजनीतिक समीकरणों और जनसमर्थन के उतार-चढ़ाव के रूप में देखने के बजाय चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता के सवाल पर भाजपा को घेरने की रणनीति अपना रही है।रायगढ़ में ओपी चौधरी और कांग्रेस प्रत्याशी के बीच हुए मुकाबले को इस आरोप से जोड़ना स्थानीय राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। हालांकि,वोट चोरी के आरोपों की पुष्टि के लिए चुनावी रिकॉर्ड और ठोस साक्ष्य आवश्यक होंगे। *ओपी चौधरी की जीत पर सवाल,प्रकाश नायक की हार को षड्यंत्र से जोड़ने की कोशिश* रायगढ़ विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी ओपी चौधरी की जीत और कांग्रेस प्रत्याशी प्रकाश नायक की पराजय अब कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के चुनावी आरोपों के बीच चर्चा में है। नाना पटोले ने प्रकाश नायक को पहले की तुलना में अधिक वोट मिलने के बावजूद लगभग 65 हजार मतों से हारने का उल्लेख करते हुए इसे कथित वोट चोरी के षड्यंत्र से जोड़ा।पटोले के बयान ने रायगढ़ के चुनावी नतीजे को लेकर राजनीतिक बहस का नया मोर्चा खोल दिया है। उनके आरोपों का निशाना भाजपा की चुनावी सफलता और उसके पीछे की प्रक्रिया है। हालांकि, किसी प्रत्याशी को अधिक वोट मिलने के बावजूद हार जाना अपने आप में चुनावी धांधली का प्रमाण नहीं है। इस मामले में कथित अनियमितताओं की पुष्टि के लिए विशिष्ट साक्ष्य और आधिकारिक रिकॉर्ड की आवश्यकता होगी।फिर भी नाना पटोले ने रायगढ़ का उदाहरण सामने रखकर भाजपा की चुनावी जीत पर राजनीतिक सवाल खड़े करने की कोशिश की है। अब देखना होगा कि कांग्रेस इन आरोपों के समर्थन में क्या तथ्य सामने रखती है और भाजपा इस हमले का क्या जवाब देती है। *‘भूपेश सरकार का काम इतना बेहतर था कि कांग्रेस की जीत तय थी’* नगर के सर्किट हाउस मे आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान पटोले ने छत्तीसगढ़ की पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार के कामकाज का हवाला देते हुए दावा किया कि सरकार ने इतना बेहतर काम किया था कि कांग्रेस की जीत तय थी। उन्होंने आरोप लगाया कि वोट चोरी के षड्यंत्र ने जनता के जनादेश में सेंधमारी की।यह बयान कांग्रेस की उस राजनीतिक रणनीति को रेखांकित करता है, जिसके तहत पार्टी अपनी चुनावी पराजय के कारणों को चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता से जोड़कर जनता के बीच ले जाना चाहती है। छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन के बाद कांग्रेस लगातार अपने पूर्ववर्ती शासन के कामकाज को अपनी राजनीतिक उपलब्धि के रूप में पेश करती रही है। पटोले ने भी इसी आधार पर भाजपा की जीत पर सवाल उठाए।लेकिन राजनीतिक दावों और चुनावी सच्चाई के बीच का अंतर प्रमाणों से ही स्पष्ट होगा। यदि कांग्रेस को लगता है कि जनादेश प्रभावित हुआ, तो उसे अपने आरोपों के समर्थन में तथ्य सामने रखने होंगे। *चुनाव आयोग से न्यायपालिका तक पर पटोले के तीखे आरोप* नाना पटोले ने कहा कि लोकतंत्र के विभिन्न स्तंभों से निराश होकर कांग्रेस अब जनता के बीच जा रही है। उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त को बचा रही है और कथित वोट चोरी के मामलों में जवाबदेही तय नहीं हो रही है।पटोले ने न्यायपालिका का उल्लेख करते हुए भी आरोप लगाया कि विपक्ष की आवाज नहीं सुनी जा रही और सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी की है।नाना ने चुनाव आयोग पर विपक्ष के उम्मीदवारों को भयभीत करने और चुनावी नतीजों मे फेरबदल कर घंटों विलंब के बाद मतदान की जानकारी देने का आरोप लगाकर लोकतंत्र की सबसे निष्पक्ष प्रणाली को संदेहास्पद बता दिया। इन आरोपों पर संबंधित संस्थाओं का पक्ष और उन मामलों के आधिकारिक रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण होंगे, जिनके आधार पर पटोले ने ये बातें कही हैं। उन्होंने कहा कि देशवासी विपक्ष से अनेक मुद्दों पर मुखर होने की अपेक्षा कर रहे हैं और कांग्रेस लोकतंत्र बचाने की लड़ाई हर हाल में जारी रखेगी। *खरगे के बयान पर पटोले का बचाव—‘मोदी को जाना पड़ेगा’* कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के हालिया बयान पर पूछे गए सवाल के जवाब में पटोले ने कहा कि 85 वर्षीय बुजुर्ग को जनसभा में भाजपा के लोगों ने इतना परेशान किया कि उलझन में उनके मुंह से कुछ निकल गया। हालांकि,उन्होंने खड़गे के कथन—‘मोदी को जाना पड़ेगा’—को दोहराते हुए कहा कि यह सच साबित होगा।पटोले का यह जवाब भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी राजनीतिक टकराव की तीव्रता को दर्शाता है। कांग्रेस जहां चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है, वहीं भाजपा की प्रतिक्रिया भी इस विवाद को आगे बढ़ा सकती है।दिल्ली की रैली पर बोले—व्यापारियों को नुकसान नहीं, फायदा होगा*एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित कांग्रेस रैली को लेकर दीपावली के बाद आयोजन करने के व्यापारियों के आग्रह पर पटोले ने कहा कि रैली से व्यापारियों को नुकसान के बजाय व्यावसायिक लाभ होगा। उनके अनुसार, बड़ी संख्या में लोगों के जुटने से बाजारों में रौनक बढ़ेगी और कारोबार को फायदा मिल सकता है। नाना पटोले ने दोहराया कि लोकतंत्र बचाने की लड़ाई कांग्रेस के लिए जरूरी है और पार्टी इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाती रहेगी। *रायगढ़ की राजनीति में गूंजेगा बयान,अब प्रमाणों पर रहेगी नजर* महाराष्ट्र कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष,पूर्व सांसद एवं रायगढ़ जशपुर प्रभारी नाना पटोले के बयान ने रायगढ़ के चुनावी मुकाबले को प्रदेश से बाहर की राजनीतिक बहस से जोड़ दिया है। ओपी चौधरी की जीत और प्रकाश नायक की हार का उल्लेख करते हुए वोट चोरी के आरोप लगाना स्थानीय सियासत में नए आरोप-प्रत्यारोप को जन्म दे सकता है।हालांकि, राजनीतिक आरोप और प्रमाणित चुनावी अनियमितता दो अलग-अलग बातें हैं। पटोले के दावों को परखने के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस रायगढ़ के चुनाव से संबंधित कौन-से विशिष्ट तथ्य प्रस्तुत करती है। भाजपा का पक्ष और उपलब्ध आधिकारिक चुनावी रिकॉर्ड भी इस बहस के अहम पहलू होंगे।फिलहाल,नाना पटोले ने अपने बयान से भाजपा की चुनावी जीत को राजनीतिक चुनौती जरूर दी है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि यह चुनौती केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहती है या इसके समर्थन में ठोस साक्ष्य भी सामने आते हैं।इस अवसर पर छग के पूर्व मंत्री नोबेल वर्मा,पूर्व विधायक प्रकाश नायक,जिला कांग्रेस अध्यक्ष द्वय शाखा यादव,नगेन्द्र नेगी एवं कांग्रेस प्रवक्ता प्रमुख रूप से उपस्थित थे।