रायगढ़ प्रदेश युवा कांग्रेस के महासचिव राकेश पाण्डेय ने बयान जारी करते हुए कहा है कि रायगढ़ पूरे देश प्रदेश में एक औद्योगिक नगरी के रूप में जाना जाता है। राज्य सरकार मुख्य मंत्री विष्णु देव साय और वित्त मंत्री ओपी चौधरी जी कहते हैं कि नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2024-30 में सब्सिडी निवेश पर नहीं बल्कि रोजगार पर मिलेगी। हो सकता है सरकार की नीयत अच्छी हो, लेकिन जमीन पर इस नीति का क्रियान्वयन होता नहीं दिख रहा हैरायगढ़ की जमीनी हकीकत:नई औद्योगिक नीति में 90 प्रतिशत स्थानीय लोगों को नौकरी देने के नाम पर अधिकतर प्लांट बाहरी लोगों को नौकरी देते हैं। जिनको ये स्थानीय बता रहे है वो यहां के मूल निवासी नहीं है नाही उनके पास स्थाई निवास प्रमाण पत्र तक हैजो स्थानीय युवाओं को जॉब दे रहे है वो अकुशल जॉब जैसे हेल्पर,सुपरवाइजर या मजदूरी का काम भी 50 प्रतिशत ही मिल पाता है। बड़े पद जैसे HR और GM जैसे पदों पर बाहरी लोग ही जमे हुए है यहां का स्थानीय युवा नौकरी के नाम पर मजदूरी कर रहा है सरकार द्वारा तय की गई मिनिमम मजदूरी भी श्रमिकों को नहीं मिल रही है,खासकर महिलाओं को तो इस न्यूनतम मजदूरी से भी वंचित रखा जा रहा है। धूल, प्रदूषण,सड़क दुर्घटना यहां के लोग झेल रहे हैं और बड़े काम-धंधे, नौकरी का मजा बाहरी लोग ले रहे हैं।युवा कांग्रेस की मांग:सरकार अगर सच में बदलाव लाना चाहती है तो एक पारदर्शी व्यवस्था पोर्टल बनाए, जिसमें यह पता चल सके कि किस उद्योग में कितने लोग स्थानीय हैं, कितने बाहरी हैं और किन-किन पदों पर कार्य कर रहे हैं।युवा कांग्रेस इस विषय पर जांच की भी मांग करती है। ऐसे उद्योग जो इस नीति के आधार पर काम नहीं दे रहे हैं,उनका सब्सिडी, स्टॉम्प शुल्क में छूट ब्याज सहित वापस लिया जाए।सब्सिडी के नाम पर करोड़ों रुपये का लाभ जो मिलता है,वो यहां की जनता की गाढ़ी कमाई का ही पैसा है, उसका दुरुपयोग बंद हो।उद्योगों के आने से जीवन बदला है, लेकिन क्या जैसा विकास चाहे वो रायगढ़ का हो या स्थानीय लोगों का,वो हुआ है? कागजो में नीतियां लाना और जमीन पर उसका यथावत क्रियान्वयन होने के लिए सरकार को दृढ़ संकल्पित होना पड़ेगा,बयान बाजी मात्र से ये नहीं होने वाला।