कुचीपुड़ी के भाव और लय से सजा चक्रधर समारोह,टी.लक्ष्मी रेड्डी की प्रस्तुति रही खास

रायगढ़ चक्रधर समारोह की शाम कुचीपुड़ी के रंग में सजी। प्रसिद्ध कुचीपुड़ी नृत्यांगना टी.लक्ष्मी रेड्डी ने ‘दुर्गा तरंगम’ और ‘यक्षगानम’ की प्रस्तुति से दर्शकों को अपनी कला से जोड़ा। नृत्य की लय,भाव और अभिनय के साथ उन्होंने दोनों प्रस्तुतियों को खूबसूरती से मंच पर उतारा।दुर्गा तरंगम’ में मां दुर्गा की शक्ति और भक्ति को भाव-भंगिमाओं के जरिए प्रस्तुत किया गया। चेहरे के भावों और नृत्य मुद्राओं में देवी के अलग-अलग रूप दिखाई दिए। वहीं ‘यक्षगानम’ में अभिनय और नृत्य का सुंदर मेल देखने को मिला। कदमों की गति के साथ बदलते भाव प्रस्तुति को खास बनाते रहे। टी. लक्ष्मी रेड्डी के लिए कुचीपुड़ी केवल नृत्य नहीं,बल्कि साधना और भक्ति है। वे पिछले दो दशकों से अधिक समय से पद्मश्री जयरामा राव के मार्गदर्शन में इस कला की साधना कर रही हैं। उनकी प्रस्तुति में वर्षों की इसी साधना और अनुभव की झलक दिखाई दी।टी.लक्ष्मी रेड्डी देश-विदेश में 2000 से अधिक प्रस्तुतियां दे चुकी हैं। उन्होंने पेरु, कोस्टा रिका,कनाडा, मलेशिया और भूटान सहित कई देशों में भारतीय शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति दी है। राष्ट्रपति भवन में ब्रिक्स देशों के राष्ट्राध्यक्षों के सामने प्रस्तुति देना भी उनके कला सफर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। उनकी कला साधना को कई सम्मान मिल चुके हैं। वे दिल्ली के समर्पण स्कूल के जरूरतमंद बच्चों को निःशुल्क कुचीपुड़ी का प्रशिक्षण देती हैं।

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