निशित के तबले और मुदस्सिर की सारंगी ने छेड़ी सुरों की खूबसूरत धुन

रायगढ़ चक्रधर समारोह की शाम तबले की थाप और सारंगी के सुरों से और भी खास हो गई। मंच पर निशित गंगानी ने तबले पर अपनी उंगलियों का हुनर दिखाया,वहीं मुदस्सिर खान ने सारंगी के भावपूर्ण सुरों से साथ दिया। दोनों के वादन में सुर, ताल और लय का सुंदर मेल सुनने को मिला। प्रस्तुति के दौरान दर्शक संगीत में खोए नजर आए और तालियों से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।निशित गंगानी ने महज तीन वर्ष की उम्र में तबला सीखना शुरू किया था। कम उम्र में ही उन्होंने मंच पर प्रस्तुति देना शुरू कर दिया और देश के कई बड़े कला मंचों पर अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं। जयपुर घराने से जुड़े निशित ने अपने गुरु पंडित फतेह सिंह गंगानी के मार्गदर्शन में तबले की साधना की। उनकी प्रतिभा को भारत सरकार की ओर से भी सम्मान मिल चुका है। वहीं मुदस्सिर खान ने सारंगी के सुरों से प्रस्तुति में भाव भर दिए। वे सारंगी वादन की समृद्ध परंपरा से जुड़े हैं और इसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उनकी सारंगी से निकले मधुर सुरों ने निशित के तबले की थाप के साथ मिलकर ऐसा माहौल बनाया, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया।

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