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विश्व पर्यावरण दिवस पर रायगढ़ में गूंजा संदेश-जल बचाएं, प्रकृति से जुड़ें और टिकाऊ खेती अपनाएं”जलवायु अनुकूल कृषि एवं विभागीय समन्वय कार्यशाला में जुटे 250 से अधिक किसान,विशेषज्ञों ने बताई भविष्य की खेती की राह

रायगढ़,बढ़ते जलवायु संकट, घटते जल संसाधनों और कृषि पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों के बीच विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर रायगढ़ में किसानों के लिए एक प्रेरणादायक एवं ज्ञानवर्धक पहल की गई। एचडीएफसी बैंक परिवर्तन सीएसआर परियोजना के अंतर्गत प्रदान संस्था द्वारा दीदी सदन, पीटीसी परिसर, रायगढ़ में “जलवायु अनुकूल कृषि एवं विभागीय समन्वय कार्यशाला” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूक बनाना, जलवायु सहनशील एवं पुनर्जीवी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना तथा विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर जल, भूमि एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के माध्यम से टिकाऊ कृषि विकास की दिशा में सामूहिक प्रयासों को मजबूत करना था।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। इसके पश्चात प्रदान टीम द्वारा जलवायु परिवर्तन विषय पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। प्रस्तुति में बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा, जल संकट, मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट तथा कृषि उत्पादन पर पड़ रहे प्रभावों को रेखांकित किया गया। साथ ही बताया गया कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, जल प्रबंधन और मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाकर ही भविष्य की कृषि को सुरक्षित बनाया जा सकता है।कार्यशाला में लगभग 225 से 250 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं, महिला किसान, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के प्रतिनिधि, एफपीसी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, रायगढ़ ब्लॉक स्तरीय महासंघ (बीएलएफ) के पदाधिकारी एवं सदस्य तथा विभिन्न किसान समूहों के प्रतिनिधि शामिल थे। कार्यक्रम में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी विशेष आकर्षण का केंद्र रही।कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों एवं अधिकारियों ने किसानों को सरकारी योजनाओं, तकनीकी नवाचारों एवं कृषि विकास के अवसरों की जानकारी प्रदान की। बीज निगम द्वारा गुणवत्तायुक्त बीजों की उपलब्धता, आवश्यक दस्तावेजों तथा बीज उत्पादक किसान पंजीयन की प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी गई। वहीं बीज प्रमाणीकरण विभाग ने प्रमाणित बीजों की पहचान, उनकी गुणवत्ता एवं उत्पादन बढ़ाने में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला।फसल बीमा विभाग ने खरीफ मौसम के लिए फसल बीमा पंजीयन की अवधि 15 जून से 31 जुलाई तक होने की जानकारी देते हुए किसानों से समय पर पंजीयन कराने का आग्रह किया। मनरेगा विभाग ने “मोर गांव मोर पानी” अभियान के अंतर्गत जल संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण, डबरी निर्माण तथा वृक्षारोपण को ग्रामीण विकास और पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण आधार बताया।उद्यानिकी विभाग ने किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने, सब्जी एवं बागवानी फसलों की खेती बढ़ाने तथा उनसे जुड़े बीमा प्रावधानों की जानकारी दी। विभाग ने बताया कि विविधीकृत खेती न केवल किसानों की आय बढ़ाती है बल्कि भूमि की उर्वरता बनाए रखने और जलवायु जोखिमों को कम करने में भी सहायक होती है।कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. ए.के. सिंह, अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय रायगढ़ ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज केवल पर्यावरणीय चुनौती नहीं बल्कि कृषि और खाद्य सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन चुका है। उन्होंने किसानों से जलवायु सहनशील बीजों, वैज्ञानिक फसल चक्र, प्राकृतिक खेती और पर्यावरण अनुकूल कृषि तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया।वहीं डॉ.बी.एस. राजपूत, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केंद्र रायगढ़ ने कृषि क्षेत्र में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए महिला सशक्तिकरण पर विशेष बल दिया। उन्होंने किसानों को जैविक खाद, गोबर खाद तथा स्थानीय संसाधनों के अधिकतम उपयोग के माध्यम से मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और उत्पादन लागत कम करने की सलाह दी।कार्यशाला के दौरान किसानों ने विभिन्न विभागों के समक्ष नई डबरी निर्माण, वृक्षारोपण, बीज उत्पादक किसान पंजीयन, कृषि एवं उद्यानिकी फसलों के बीमा तथा सौर ऊर्जा आधारित लिफ्ट सिंचाई योजनाओं की मांग रखी। विभागीय अधिकारियों ने इन मांगों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाने तथा समन्वित प्रयासों के माध्यम से किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का आश्वासन दिया।विशेष रूप से किसानों ने पुनर्जीवी कृषि (Regenerative Agriculture) के प्रति गहरी रुचि दिखाई। उन्होंने मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाने, जैविक पदार्थों के उपयोग को प्रोत्साहित करने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ खेती करने की अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। किसानों का मानना था कि ऐसी कृषि पद्धतियां न केवल उत्पादन बढ़ाएंगी बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।कार्यक्रम में प्रमुख रूप से श्री अजय जायसवाल (सहायक संचालक कृषि), श्री पोखराज पटेल (बीज प्रबंधक, बीज निगम), श्री जेम्स मिंज (उप बीज प्रमाणीकरण अधिकारी), श्री लेखराम पटेल (ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी), श्री प्रतोष मेहर, श्री धीरपाल सिंह एवं सुश्री श्रद्धा नायक (तकनीकी सहायक, मनरेगा), डॉ. ए.के. सिंह (अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय रायगढ़), डॉ. बी.एस. राजपूत (वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केंद्र रायगढ़), श्री पंकज कुमार एवं श्री असीत खाखा (सहायक विकास विस्तार अधिकारी, जनपद पंचायत रायगढ़), सत्य नारायण बेहेरा टीम कॉर्डिनेटर प्रदान रायगढ़ सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण एवं जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने का सामूहिक संकल्प लिया। उन्होंने यह विश्वास व्यक्त किया कि यदि किसान प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर खेती करेंगे, तो न केवल कृषि अधिक लाभकारी बनेगी बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित, समृद्ध और टिकाऊ भविष्य का निर्माण भी संभव होगा।“जब किसान प्रकृति के साथ कदम मिलाकर खेती करेगा, तभी पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और कृषि समृद्ध बनेगी।”

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