Homeरायगढ़ न्यूजनाम‘शशि’ काम ‘सूर्य’ का:चंद्रमा सी शीतलता वाले एसपी ने सटोरियों पर बरसाई...

नाम‘शशि’ काम ‘सूर्य’ का:चंद्रमा सी शीतलता वाले एसपी ने सटोरियों पर बरसाई आग, पूरा साम्राज्य खाकशशि’ की शीतलता के पीछे छिपा था ‘सूर्य’ का प्रचंड तेज: एक झटके में राख हुआ सट्टा साम्राज्यशशि मोहन की कलम से लिखी गई रायगढ़ में‘सट्टा-मुक्त’ क्रांति की इबारतरायगढ़ में सट्टा साम्राज्य का अवसान:पुलिस अधीक्षक शशि मोहन की निष्पक्षता ने लिखी नई इबारत

रायगढ़ किसी नगर की शांति जब जुए के द्यूत-कक्ष में दांव पर लग जाए,तो शासन का दायित्व बनता है कि वह कालिय नाग के फन को कुचल दे। रायगढ़ में वर्षों से पनप रहे सट्टे के विष-वृक्ष पर पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह ने ऐसी कुल्हाड़ी चलाई है कि उसकी जड़ें तक कांप उठीं। शशि मोहन सिंह प्रशासनिक इच्छाशक्ति का अप्रतिम उदाहरण बन गए।यह सत्य है कि रायगढ़ की धरती ने अनेक पुलिस अधीक्षक देखे,और कार्यवाहियाँ भी हुईं। किंतु श्री शशि मोहन सिंह की पदस्थापना ने इस अभियान को ‘शंखनाद’ में परिवर्तित कर दिया। उनके नेतृत्व में पुलिस ने सट्टे के विरुद्ध ‘शून्य सहनशीलता’ का वज्र उठाया। सतत छापामारी,अविरल गिरफ्तारी और संपत्ति की जब्ती के प्रहार से सट्टा माफिया का मनोबल चूर-चूर हो गया। दृश्य अभूतपूर्व था- कानून के भय से थर्राए सटोरिये स्वयं थाने की देहरी पर आत्मसमर्पण हेतु कतारबद्ध दिखे। रायगढ़ ने यह परिदृश्य अपने इतिहास में प्रथम बार अवलोकित किया।राजनीतिक छत्र-छाया में फलने फूलने के मिथक को नेस्तनाबूद करने में भी उन्होंने सफलता पाई। ‘करण चौधरी’ प्रकरण ने समूचे जनमानस को झकझोर कर रख दिया। अंतरजाल पर विभिन्न राजनीतिक दलों के कर्णधारों संग उसकी छाया-चित्रें तैरने लगीं,तो जन-जन के अधरों पर एक ही प्रश्न मंडराने लगा- इसका त्राता कौन?’आरोपों-प्रत्यारोपों के मध्य भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने आ खड़े हुए। किंतु पुलिस अधीक्षक शशि मोहन की निष्कलंक,निष्पक्ष कार्यशैली ने यह सिद्ध कर दिया कि वर्तमान साय सरकार के शासनकाल में अपराध का कोई गोत्र नहीं होता,कोई राजनीतिक कवच नहीं चलता। परिणामतः करण चौधरी का समूचा द्यूत-साम्राज्य धूल-धूसरित हो गया। पहली बार कलकत्ता से गोवा से तक कानून का डंका बजा।अनुसंधान की पतवार जब आगे बढ़ी तो इस पातक-व्यापार के सूत्र गोवा के ‘नथानी’ और कलकत्ता के क्रीड़ा-स्थलों तक बंधे मिले। कहावत थी कि ‘कानून के हाथ लंबे होते हैं’,परंतु रायगढ़ पुलिस ने श्री शशि मोहन के नेतृत्व में इसे चरितार्थ कर दिखाया। तकनीकी साक्ष्यों के धागे पकड़कर पुलिस की टोली ने सुदूर प्रदेशों में छिपे सूत्रधारों तक को कानून के कटघरे में ला खड़ा किया।रायगढ़ वासियों ने देखा कैसे क्रिकेट के सट्टा ने आधा दर्जन युवाओं की बलि ले ली और मयंक प्रकरण जन-आक्रोश का कारण बन गया। क्रिकेट सट्टे की विभीषिका ने आधा दर्जन कोमल किशलयों को असमय काल-कवलित कर दिया। मयंक की आत्माहुति ने तो समाज की चेतना को ही झकझोर डाला। शोकाकुल,आक्रोशित जनसमूह सड़कों पर उतर आया और सट्टे के सर्वनाश की मांग पर अड़ गया। जन-पीड़ा की इस अग्नि को पुलिस अधीक्षक शशि मोहन ने अपनी कार्रवाई की ऊर्जा बनाया।उनकी कार्यवाही विश्वास का नवोदय बन गई।जनचर्चा है कि बीते कार्यकालमेंसट्टा-व्यवसायपल्लवित-पुष्पित होता रहा और ‘महादेव सट्टा’ प्रकरण को लेकर सार्वजनिक विमर्श में कई प्रश्न अनुत्तरित रहे। किंतु आज,साय सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति एवं पुलिस अधीक्षक शशि मोहन की प्रखर,निर्भीक कार्यप्रणाली ने रायगढ़ के आकाश को स्वच्छ कर दिया है। कानून के इस राज में जन-जन का विश्वास पुनः अंकुरित हुआ है। श्री शशि मोहन सिंह की यह कर्तव्यपरायणता,यह निष्पक्षता,यह साहसिकता रायगढ़ के लिए एक ‘स्वर्णिम अध्याय’ बन गई है। उनके नेतृत्व में जिला अब अपराध-मुक्त,भय-मुक्त और सट्टा-मुक्त भविष्य की ओर अग्रसर है।

spot_img

Must Read

spot_img