
रायगढ़ जिले की कानून व्यवस्था, पुलिसिंग की सख्ती और इंसानियत भरे व्यवहार का एक मजबूत चेहरा रविवार को हमेशा के लिए खामोश हो गया। जिले के जांबाज,कर्मठ और बेहद लोकप्रिय पुलिस अधिकारी अमित शुक्ला का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे लंबे समय से ब्रेन कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से संघर्ष कर रहे थे और रायपुर के एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल में उपचाररत थे। 17 मई रविवार को उन्होंने अंतिम सांस ली।
उनके निधन की खबर फैलते ही पुलिस विभाग, प्रशासनिक गलियारों और आम लोगों के बीच गहरा शोक छा गया। रायगढ़ ने केवल एक थानेदार नहीं खोया, बल्कि ऐसा पुलिस अधिकारी खो दिया जिसने वर्दी की ताकत को कभी रौब नहीं, बल्कि जिम्मेदारी समझा।अमित शुक्ला उन चुनिंदा पुलिस अधिकारियों में गिने जाते थे जिनके नाम से अपराधियों में खौफ और आम लोगों के मन में भरोसा पैदा होता था। जिले के कई थानों में पदस्थ रहते हुए उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। लोग उन्हें “मिस्टर क्लीन”और “टॉप कॉप” जैसे नामों से पुकारते थे।वे जिस थाने में रहे,वहां शरीफ और आम नागरिकों को अपने अमन-चैन की चिंता नहीं रही। अपराधियों के लिए वे बेहद सख्त थे, लेकिन पीड़ितों और जरूरतमंदों के लिए उतने ही संवेदनशील। कानून व्यवस्था की हर कसौटी पर खरा उतरने वाला यह अधिकारी बड़े से बड़े मामलों को अकेले संभाल लेने का साहस और क्षमता रखता था। कई कठिन मिशनों में उन्होंने उल्लेखनीय सफलता हासिल की। कप्तानों को भी उनकी कार्यशैली पर गर्व हुआ करता था। पुलिस और पब्लिक के बीच संवाद और भरोसे का रिश्ता कैसे बनाया जाता है,यह कला अमित शुक्ला बखूबी जानते थे। वे केवल कार्रवाई करने वाले पुलिस अधिकारी नहीं थे,बल्कि लोगों की बात सुनने और उन्हें न्याय का भरोसा दिलाने वाले अफसर थे।
कर्तव्य के प्रति उनका समर्पण इतना गहरा था कि बीमारी के दौर में भी वे मानसिक रूप से कभी कमजोर नहीं पड़े। उनका एक वाक्य आज भी लोगों के जेहन में गूंज रहा है-श्रेय भले ना मिले, लेकिन अपना सर्वश्रेष्ठ देने से कभी पीछे मत हटो।”*यही सोच उनके पूरे जीवन और पुलिस सेवा में दिखाई देती रही।अमित शुक्ला जिले के लगभग हर थाने में अपनी सेवाएं दे चुके थे और उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी पहचान यह रही कि वे मामलों को लटकाने में नहीं,उन्हें परिणाम तक पहुंचाने में विश्वास रखते थे। तेज निर्णय क्षमता,अनुशासन,नियंत्रण और निष्पक्षता ने उन्हें पुलिस विभाग में अलग मुकाम दिया।लेकिन जिंदगी की सबसे कठिन लड़ाई में यह जांबाज थानेदार आखिरकार हार गया। कैंसर ने उस मजबूत इंसान को हमसे छीन लिया, जो दूसरों को सुरक्षा और भरोसा देता था।आज रायगढ़ की फिजाओं में एक सन्नाटा है। पुलिस महकमे की आंखें नम हैं। जिन लोगों ने अमित शुक्ला के साथ काम किया,वे जानते हैं कि यह केवल एक अधिकारी का निधन नहीं, बल्कि पुलिसिंग के एक बेहतरीन अध्याय का अंत है।जब भी रायगढ़ में बहादुर,ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ थानेदारों की चर्चा होगी,अमित शुक्ला का नाम सबसे पहले सम्मान और गर्व के साथ लिया जाएगा।



