रायगढ़ जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार हो रहे हादसों को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी शहर अध्यक्ष शाखा यादव ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। शिव शक्ति स्टील प्लांट में फ्लाईऐश की चपेट में आने से मजदूर के बुरी तरह घायल होने की घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि औद्योगिक इकाईयों में कार्यरत मजदूरों का ना पीएफ,ना दुर्घटना बीमा बस ठेकेदार के भरोसे ही जिंदगी है। जिले में शासन-प्रशासन की लायरवाही से औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का सिलसिला लगातार जारी है और इसका सबसे बड़ा खामियाजा गरीब मजदूरों को अपनी जान जोखिम में डालकर भुगतना पड़ रहा है।शाखा यादव ने कहा कि औद्योगिक सुरक्षा का मुद्दा कांग्रेस ने आज नहीं उठाया है बल्कि जिला कांग्रेस कमेटी पहले भी जिले में संचालित औद्योगिक इकाइयों में मजदूरों की सुरक्षा, सुरक्षा मानकों के पालन और श्रम कानूनों के अनुपालन को लेकर औद्योगिक विभाग तथा जिला प्रशासन को धरना, प्रदर्शन और ज्ञापन के माध्यम से लगातार अवगत कराती रही है। कांग्रेस ने समय-समय पर औद्योगिक क्षेत्रों का निरीक्षण कराने, सुरक्षा व्यवस्था की जांच करने और लापरवाही बरतने वाली इकाइयों के विरुद्ध तालाबंदी जैसे कठोर कार्रवाई की मांग की गई है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर सिर्फ और सिर्फ मामूली जुर्माने कार्रवाई की खानापूर्ति के अलावा अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं गई।उन्होंने कहा कि यदि समय रहते औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा व्यवस्था की नियमित और निष्पक्ष जांच होती, सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर कड़ी कार्रवाई की जाती और मजदूरों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता तो ऐसे हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता था। हादसा होने के बाद जांच और मामूली मुआवजे की घोषणा करना पर्याप्त नहीं है, हादसे से प्रभावित बुजुर्ग मां-बाप के बुढ़ापे की लाठी, पत्नी के जीवन का सहारा,उसके मांग का सिंदूर,बच्चों के भविष्य का आसरा छीन जाता है जिसकी पूर्ति कितनी भी बड़ी मुआवजा राशि से नहीं की जा सकती। सरकार की जिम्मेदारी है कि हादसा होने की नौबत ही न आए।
शाखा यादव ने आरोप लगाया कि औद्योगिक विकास के नाम पर सरकार बड़े उद्योगों और उद्योगपतियों की सुविधाओं की चिंता तो करती दिखाई देती है, लेकिन उन्हीं उद्योगों में खून-पसीना बहाने वाले मजदूरों की सुरक्षा को नजरअंदाज कर प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। आए दिन किसी न किसी औद्योगिक इकाई से दुर्घटना की खबर सामने आती है। कहीं मजदूर घायल होते हैं तो कहीं उनकी जान चली जाती है। इन हादसों के बाद एक परिवार का कमाने वाला सदस्य हमेशा के लिए उनसे दूर हो जाता है और पूरा परिवार आर्थिक संकट तथा असुरक्षा के बीच जीवन जीने को मजबूर हो जाता है।उन्होंने कहा कि मजदूर केवल उद्योगों में काम करने वाला व्यक्ति नहीं, अपने परिवार की पूरी उम्मीद होता है। उसकी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ का अर्थ उसके पूरे परिवार के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। लगातार हो रहे औद्योगिक हादसों से गरीब मजदूरों के परिवार उजड़ रहे हैं और कई परिवार अपने कमाने वाले सदस्य को खोकर अनाथ जैसे जीवन जीने को मजबूर हो रहे हैं।कांग्रेस जिला अध्यक्ष शाखा यादव ने जिला प्रशासन से मांग की कि जिले की सभी औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों की विशेष एवं व्यापक जांच कराई जाए। जिन उद्योगों में सुरक्षा व्यवस्था में कमी पाई जाए, उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए तथा मजदूरों के लिए अनिवार्य सुरक्षा उपकरण,प्रशिक्षण,आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था और दुर्घटना की स्थिति में तत्काल राहत की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस मजदूरों की सुरक्षा के सवाल पर चुप नहीं बैठेगी। यदि उद्योगों का संचालन जरूरी है,औद्योगिक विकास भी जरूरी है तो इससे कहीं ज्यादा मजदूरों की सुरक्षा भी जरुरी है। विकास की कीमत मजदूरों की जिंदगी नहीं हो सकती। सरकार और प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि उद्योगों की मशीनों के साथ काम करने वाले मजदूरों की जिंदगी भी उतनी ही महत्वपूर्ण समझी जाए, जितनी उद्योगों की उत्पादन क्षमता और मुनाफे को समझा जाता है।
औद्योगिक सुरक्षा के प्रति सरकार की लापरवाही मजदूरों की जान पर भारी :शाखा यादव
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